शहीद से पहले ठाकुर जिउ और सिद्धो का संवाद
शहीद से पहले ठाकुर जिउ और सिद्धो का संवाद [ दृश्य: सिद्धो एक साल वृक्ष के नीचे बैठे हैं। अगले दिन उन्हें पकड़ लिया जाएगा। रात शांत है। वह ठाकुर जिउ से प्रार्थना करते हैं। अचानक, एक मधुर आवाज़ वातावरण में गूँजती है।] सिद्धो: (हाथ जोड़कर) हे ठाकुर जिउ, आपने ही मुझे यह भार दिया कि मैं अपने लोगों को अन्याय के विरुद्ध खड़ा करूँ। कल मैं शायद गोरे शासकों की गोलियों का शिकार हो जाऊँ। बताइए, क्या मेरे संथाल भाई-बहन मेरे बलिदान को याद रखेंगे, या फिर भूलकर दोबारा गुलामी और कमजोरी में गिर पड़ेंगे? ठाकुर जिउ: (धीरे स्वर में) सिद्धो, मेरे पुत्र, तुम्हारा रक्त व्यर्थ नहीं जाएगा। एक बीज मिट्टी में मरता है ताकि वह एक विशाल वृक्ष बन सके। तुम्हारा बलिदान भी तुम्हारे लोगों के लिए ऐसा ही बीज होगा। सिद्धो: परंतु प्रभु, मुझे उनकी चिंता है। मैं देखता हूँ कमज़ोरी की छाया, शराब, अज्ञान, आपसी फूट और अंधविश्वास। क्या ये सब उस एकता को नष्ट नहीं कर देंगे जिसके लिए मैंने संघर्ष किया ? ठाकुर जिउ: हाँ, सिद्धो। रास्ता कठिन है। तुम्हारे लोग कभी ठोकर खाएँगे, कभी भूल भी जाएँगे। पर मेरी आत्मा...